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सृष्टि और आदेश को समझने के लिए ब्रह्मांडीय जीवन
की केंद्रिकता और क्रम को समझना आवश्यक है। ब्रह्मांड की प्रत्येक आकृति के तीन
अस्तित्व होते हैं।
पहले अस्तित्व का स्थापन सुरक्षित पट्टिका (लौह-ए-महफ़ूज़) में है।
दूसरे अस्तित्व का स्थापन लोक प्रतिरूप (आलम-ए-तम्साल) में है।
तीसरे अस्तित्व का स्थापन आलम-ए-रंग में है।
आलम-ए-रंग से अभिप्राय ब्रह्मांड के वे सभी
भौतिक शरीर हैं जो रंगों की सामूहिकता पर आधारित हैं। ये शरीर असंख्य रंगों में से
अनेक रंगों का संयोजन होते हैं। ये रंग नस्मह की विशेष गतियों से अस्तित्व में
आते हैं। नस्मह की एक निश्चित लंबाई की गति
से एक रंग बनता है। दूसरी लंबाई की गति से दूसरा रंग। इस प्रकार नस्मह की असंख्य
लंबाईगत गतियों से असंख्य रंग अस्तित्व में आते हैं। इन रंगों का संख्यात्मक समूह प्रत्येक प्रकार (नऊ) के लिए अलग-अलग निश्चित है। यदि गुलाब के लिए
रंगों का अलिफ़ संख्यात्मक समूह निर्धारित है तो
उसी अलिफ़ संख्यात्मक समूह से सदैव गुलाब ही
अस्तित्व में आएगा, कोई अन्य वस्तु अस्तित्व में नहीं
आएगी। यदि आदमज़ाद की रचना रंगों की जीम संख्या से होती है तो उस संख्या से
कोई अन्य पशु निर्मित नहीं हो सकता। केवल मानव-प्रकार ही के व्यक्ति अस्तित्व में
आ सकते हैं। ईश्वर ने क़ुरआन में इस नियम को स्पष्ट रूप से बयान किया है:
فِطْرَتَ اللّٰہِ الَّتِیْ فَطَرَ النَّاسَ عَلَیْھَا لَاتَبْدِیْلَ لِخَلْقِ اللّٰہِ-फित्रतल्लाहिल्लती फतरन्नास अ़लैहा, ला तबदीला लि-ख़ल्किल्लाह" (सूरह रूम, आयत 30)
यहाँ फितरत से अभिप्राय नस्मह की गति की लंबाई, उसकी गति और उसका जमाव है। आलम-ए-रंग में जितनी वस्तुएँ पाई जाती हैं वे
सब रंगीन रोशनियाँ का समूह हैं। इन्हीं रंगों के जमाव से वह वस्तु
अस्तित्व में आती है जिसे सामान्य भाषा में माद्दा (पदार्थ) कहा जाता है। जैसा कि समझा जाता है यह पदार्थ कोई ठोस वस्तु नहीं है। यदि इसे तोड़कर और
बिखेरकर अंतिम मानों तक पहुँचा दिया जाए तो केवल रंगों की पृथक-पृथक किरणें ही शेष रह जाएँगी। यदि अनेक रंग लेकर जल में घोल दिए
जाएँ तो एक मिट्टी जैसा मिश्रण बन जाता है जिसे हम मिट्टी कहते
हैं। घास, पौधों और वृक्षों की जड़ें जल की
सहायता से मिट्टी के कणों को तोड़कर और छानकर उन्हीं रंगों में से अपनी प्रजाति के
रंग ग्रहण कर लेती हैं। वे सभी रंग पत्तियों और पुष्पों में प्रकट हो जाते हैं। सभी सृष्टियों और अस्तित्व की प्रकट जीवन-धारा इसी रासायनिक क्रिया पर आधारित है।
नस्मह की गति भीतरी जीवन से बाहरी जीवन तक कार्य करती है और बाहरी जीवन को मज़हर (प्रत्यक्ष रूप) की आकृति देती है। वस्तुतः यह
आकृति केवल रंगों की सामूहिकता है। नस्मह के भीतर दो प्रकार की मज़हरियत (प्रकटन) होती है:
प्रारम्भिक गति की लंबाई (हरकत का तूल)
क्रम में दूसरा गति की गति (हरकत की रफ़्तार)
गति की लंबाई कालिकता (मक़ानियत) है और गति की गति कालिकता (ज़मानियत) है। गति की ये दोनों विधाएँ एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकतीं।