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जो कुछ
हमारे ज्ञान और अनुभूति में है उसका बड़ा अंश अधिकतर निराकार अर्थात् बिना रूप और
आकृति का माना जाता है। किन्तु यह भ्रांति है। प्रत्येक वस्तु रूप और आकृति रखती
है,
चाहे
वह वह्म और विचार ही क्यों न हो। जिसको परिभाषा में अनस्तित्व
कहा जाता है वह भी एक अस्तित्व है—ऐसा
अस्तित्व जो रूप और आकृति धारण करता है।