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अवतरण-क्रम " तनज़ुलात"

 

अब हम अवतरणों का उल्लेख करते हैं ताकि इस निस्बत की वास्तविकता स्पष्ट हो जाए। प्रत्यक्ष (जली) अवतरण तीन हैं। प्रत्येक प्रत्यक्ष अवतरण के साथ एक अप्रत्यक्ष (ख़फ़ी) अवतरण भी है। हर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवतरण के साथ एक वरूद या एक साक्षात्कार का संबंध है। पहला प्रत्यक्ष अवतरण रहस्य(सिर)--अकबर है, दूसरा प्रत्यक्ष अवतरण रूह--अकबर है और तीसरा प्रत्यक्ष अवतरण शख़्स--अकबर है। शख़्स--अकबर उस प्रकट का नाम है जिसे ब्रह्मांड कहते हैं। यही ब्रह्मांड भौतिक आँख देखती और पहचानती है। ब्रह्मांड की संरचना में प्रथम आधार वह रोशनी है जिसे पवित्र ग्रंथ ने जल (पानी) के नाम से उल्लेख किया है।

आधुनिक विज्ञान में इसे गैसों के नाम से व्यक्त किया जाता है। इन्हीं सैकड़ों गैसों के मेल से प्रारम्भ में जो संयोजन बना, उसे पारा या पारे के विविध रूपों में एक प्रकट के रूप में देखा जाता है। इन्हीं संयोजनों की अनेक विधियों से भौतिक पिंडों की संरचना होती है और इन्हीं भौतिक पिंडों को त्रिविध उत्पत्तिपशु, वनस्पति और जड़कहा जाता है। सूफ़ी भाषा में इन इन गैसों में से प्रत्येक गैस के प्रारम्भिक रूप का नाम नस्मा है। दूसरे शब्दों में, नस्मा गति की उन मौलिक किरणों के समूह का नाम है जो अस्तित्व की शुरुआत करती हैं।

गति यहाँ उन रेखाओं को कहा गया है जो अंतरिक्ष में इस प्रकार फैली हुई हैं कि न तो वे एक-दूसरे से दूरी पर हैं और न ही एक-दूसरे में विलीन हैं। यही रेखाएँ भौतिक पिंडों में आपसी संबंध का माध्यम हैं। इन रेखाओं को केवल साक्षात्कार की वह निगाह देख सकती है जिसे आत्मा की निगाह कहा जाता है। कोई भी भौतिक दूरबीन इन्हें किसी रूप में नहीं देख सकती, किन्तु उनके प्रभावों को भौतिकता प्रकट के रूप में अनुभव कर सकती है। इन्हीं रेखाओं को ज्ञानी जनों की खोज में तमसुल  की अभिव्यक्ति कहा जाता है।

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लोह़ ओ कलम Loh o Qalam

Qalandar Baba Aulia Rahmatullah Alai