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इन ही
नामों का ज्ञान आदम अलैहिस्सलातो वस्सलाम को दिया गया था। इन ही नामों का ज्ञान
प्रतिनिधित्व (नियाबत) की
निधि है। इन ही नामों के ज्ञान को तसव्वुफ़ की भाषा में अल्म-ए-लदुन्नी कहते
हैं।
وَعَلَّمَ اٰدَمَ الْاَسْمَآءَ كُلَّهَا
जब ईश्वर ने ज्ञान का विभाजन किया तो सबसे पहले अपने गुणों के नामों का परिचय कराया। इन ही नामों को नाम-ए-गुणात्मक कहा जाता है। यही नाम वह ज्ञान हैं जो ईश्वर के ज्ञान का प्रतिबिम्ब हैं। गुण की परिभाषा के बारे में यह जानना आवश्यक है कि ईश्वर के हर गुण के साथ नहर-एऔर रहमतके गुण भी संगृहीत होते हैं, जैसे रबानियत के गुण के साथ नहर-एऔर रहमतभी सम्मिलित हैं या समदियत के गुण के साथ नहर-एऔर रहमतशामिल हैं। इसी तरह अहदियत के गुण के साथ नहर-एऔर रहमतके गुण का होना अनिवार्य है। अर्थात् ईश्वर का कोई भी गुण नहर-एऔर रहमतके बिना नहीं है। जब हम ईश्वर को बसीर कहते हैं तो उसका तात्पर्य यह होता है कि ईश्वर बसीर होने के गुण में क़ादिर और रहीम भी है, यानी उसे बसीर होने में पूर्ण शक्ति और पूर्ण सृजनात्मक नहर-एप्राप्त है।