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दर्शन के इन्द्रिय

 

दर्शन के इन्द्रियों का सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह है कि वे व्यक्ति के भीतर सीमित रहते हैं। ये इन्द्रिय अन्य व्यक्तियों के प्रभाव और अवस्थाओं को नहीं जान सकते। इन्द्रियों को परम सत्ता ने क़ुरआन में इल्लीइन और सिज्जीन दो रूपों में व्यक्त किया है। इल्लीइन उच्च रूप है और सिज्जीन निम्न। इन्द्रियों में ये दोनों रूप अभिलेखित होते रहते हैं। लोक-नासूत में इन रूपों का अभिलेख दृष्टियों के समक्ष नहीं रहता अपितु इन्द्रियों के भीतर गुप्त रहता है। परम सत्ता ने इन दोनों अभिलेखों को "किताब-उल-मरक़ूम" कहा है। जैसे ही मनुष्य लोक-नासूत से विच्छेद होता है, दर्शन के इन्द्रिय दमन हो जाते हैं। साथ ही आत्मा के इन्द्रिय का प्रभुत्व हो जाता है और दर्शन के अभिलेखों में से उन आवश्यकताओं का अभिलेख गुप्त रहता है जिनकी क्षमता उत्पन्न नहीं की गयी थी। क़ियामत के दिन जब ब्रह्माण्ड की प्रथम यात्रा पूर्ण हो जाएगी तो मनुष्य और जिन्नातजो ब्रह्माण्ड की यात्रा का परिणाम हैंएकत्र किये जाएंगे ताकि ब्रह्माण्ड की दूसरी यात्रा का प्रारम्भ हो। उस दिन उन आवश्यकताओं का अभिलेख नष्ट कर दिया जाएगा जिनकी क्षमता उत्पन्न नहीं की गयी थी।

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Loh o Qalam (Hindi)

Qalandar Baba Aulia Rahmatullah Alai