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निगाह की शक्ति



जिन्न अथवा जिन्न की दुनिया = नस्‍मा मफ़रद अथवा हरकत मफ़रद





मनुष्य अथवा मनुष्य की दुनिया = नस्‍मा मुरक़ब अथवा हरकत मुरक़ब


ईश्वर ने क़ुरआन पाक में फ़रमाया है कि मैंने हर वस्तु को दो प्रकार पर उत्पन्न किया है:


وَمِنْ كُلِّ شَيْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ


(
पारा 27, रुकू 2, आयत 49)

अनुवाद (मौलाना थानवी): और हमने हर चीज़ को दो-दो प्रकार बनाया ताकि तुम (इन उत्पन्न वस्तुओं से एकत्व को) समझो।

यहाँ यह समझना आवश्यक है कि गति की सृष्टि में दो-दो प्रकार की क्या प्रकृति है। इस प्रकृति के विश्लेषण में अनुभूति (हस्स) को भली प्रकार जानना ज़रूरी है। हमने श्यामपट्ट की मिसाल में अनुभूति के दोनों पक्षों का उल्लेख किया है। वास्तव में वही दोनों पक्ष यहाँ भी चर्चा में आते हैं।

जिस वस्तु को हम गति कहते हैं वह केवल एक अनुभूति है, जिसका एक पक्ष बाहरी दिशा में है और दूसरा पक्ष भीतर की ओर है। जब नस्मा के भीतर एक रूप विशेष क्रमों के अधीन उत्पन्न होता है तो वह ऐसी गतियों का समूह बनता है जो एक ओर स्वयं रूप की अनुभूति है और दूसरी ओर रूप की लोक का अनुभव है।

हम इसकी व्याख्या इस प्रकार कर सकते हैं कि जिनको सूफ़ीजन प्रकट अस्तित्व (ज़ाहिर अल-वुजूद) कहते हैं, वह दो स्तरों पर आधारित है। इनमें से पहला स्तर कोई आयाम नहीं रखता और दूसरे स्तर में पहले स्तर के रूपांकन आयामों सहित प्रकट होते हैं। लेकिन इस अवस्था तक केवल प्राकृतिक विशेषताओं का अस्तित्व होता है, प्रकृति की सक्रियता नहीं होती। धर्म ने पहले स्तर का नाम आत्माओं का लोक (आलम--अरवाह) रखा है और इस लोक के अवयवों को आत्मा कहा है। दूसरा स्तर प्रतिमा-लोक (आलम--मिसाल) का है और पारिभाषिक रूप से दूसरे स्तर के प्रत्येक अवयव का नाम प्रतिमा (तमसुल) है। इन दोनों स्तरों में वही भेद है जो हम ऊपर स्पष्ट कर चुके हैं।

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लोह़ ओ कलम Loh o Qalam

Qalandar Baba Aulia Rahmatullah Alai