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तदल्ला ईश्वर
की उन समष्टिगत गुण का नाम है जिनका प्रतिबिम्ब मनुष्य के साबिता को
प्राप्त है। क़ुरआन पाक में जिस "नियाबत " ईश्वरीय
प्रतिनिधित्व का
उल्लेख है और ईश्वर ने
इल्मुल-अस्मा की
हैसियत में जो ज्ञान आदम को प्रदान किया था, उसके गुण और
अधिकार के विभाग
तदल्ला ही के
रूप में अस्तित्व रखते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपनी "नियाबत " ईश्वरीय
प्रतिनिधित्व के
अधिकारों को समझना चाहे तो उसे तदल्ला के अवयवों की पूरी जानकारी प्राप्त करनी होगी।
सबसे
पहले यह जानना आवश्यक है कि ईश्वर का प्रत्येक अस्मा (नाम) ईश्वर
की एक गुण का नाम होता है और वह गुण आंशिक रूप से ईश्वर के प्रतिनिधि यानी मनुष्य
को अनादि काल में प्रदान हुआ था। उदाहरण के लिए, ईश्वर
का एक नाम है
रहीम।
इसकी गुण है
सृष्टि
करना
यानी
उत्पन्न करना। इसलिए सृष्टि की जितनी भी विधाएँ अस्तित्वमान
में प्रयुक्त हुई हैं,
उन
सबका प्रेरक और
ख़ालिक़ रहीम
है। यदि कोई व्यक्ति रहीम की आंशिक गुण का लाभ उठाना चाहे तो
उसे
अस्मा-ए-रहीम की गुण
का अधिक से अधिक भंडार अपने आंतरिक स्वरूप में संचित करना होगा। इसका साधन भी मुराकबा है। एक
निश्चित समय निर्धारित कर के साधक को अपनी विचारधारा के भीतर यह अनुभव करना चाहिए कि उसकी स्वरूप को
ईश्वर की गुण रहीमी
का एक अंश प्राप्त
है।
क़ुरआन पाक में ईश्वर ने जहाँ ईसा (अलैहिस्सलातो वस्सलाम) के "मोज़िज़ात " दैवी चमत्कार का उल्लेख किया है, वहाँ यह बताया है कि मैंने ईसा को आत्मा फूँकने का गुण प्रदान किया है। यह गुण मेरी ओर से स्थानांतरित हुआ और उसके परिणाम मैंने प्रदान किए।
— (सूरए
माइदा : आयत 110)
अनुवाद :"और जब तू मिट्टी से मेरे आदेश से जीव की आकृति बनाता है, फिर
उसमें फूँक मारता है तो वह मेरे आदेश से जीव हो जाता है; और तू
जन्म से अंधे को और कोढ़ी को मेरे आदेश से अच्छा कर देता है; और जब
तू मेरे आदेश से मुर्दों को जीवित कर खड़ा कर देता है।"
शब्दों के अर्थों में अस्मा रहीम की गुण मौजूद है।