Topics

ईश्वरीय नामों की संख्या ग्यारह हज़ार है।

 

ये नाम तीन संदर्भ में विभाजित हैं

प्रथम: ईश्वरीय नाम--इ़तलाक़िया

द्वितीय: ईश्वरीय नाम--अइ़निया

तृतीय: ईश्वरीय नाम--कोनिया

ईश्वरीय नाम--इ़तलाक़िया वे नाम हैं जो केवल ईश्वर के परिचय में हैं। मनुष्य या अस्तित्वगत तत्वों का उनसे प्रत्यक्ष कोई संबंध नहीं। उदाहरण के लिएअलीम। ईश्वर अलीम है, और वह अपने ज्ञान तथा गुणों से स्वयं ही परिचित है। मनुष्य का अवधारणा या ज़ेह्न की कोई उड़ान भी ईश्वर के अलीम होने की छवि को किसी प्रकार स्थापित नहीं कर सकती। अलीम की अलीम की यह प्रकृति व्यापक नाम भी है यहाँ पर व्यापक नाम की दो स्थितियाँ क़ायम हो जाती हैं। अलीम ब-स्थिति ज़ात और अलीम ब-स्थिति अनिवार्य परमात्मा। अलीम ब-स्थिति ज़ात ईश्वर का वह गुण है जिसकी निस्बत अस्तित्वगत तत्वों को प्राप्त नहीं और अलीम ब-स्थिति अनिवार्य परमात्मा वह गुण है जिसकी निस्बत अस्तित्वगत तत्वों को प्राप्त है पहली निस्बत को प्रथम अवतरण कहा जाता है।

ईश्वरीय व्यापक नामों की संख्या सूफ़ी साधक के निकट लगभग ग्यारह हज़ार है। इन ग्यारह हज़ार ईश्वरीय व्यापक नामों के एक पक्ष का प्रतिबिम्ब सूक्ष्म तत्त्व-अख़फ़ा और दूसरे पक्ष का प्रतिबिम्ब सूक्ष्म तत्त्व-ख़फ़ी कहलाता है। इस प्रकार प्रथम निस्बत में साबिता ईश्वर की ग्यारह हज़ार गुण का समष्टि है। साबिता का लेख पढ़कर एक रहस्यमय सत्य का ज्ञानी उन ग्यारह हज़ार तजल्लियों के तमसुल  का साक्षात्कार करता है।

साबिता को जब अलीम का संबंध दिया जाता है तो उसका अर्थ यह होता है कि अस्तित्वगत तत्व ईश्वर से ब-स्थिति अलीम एक संबंध रखते हैं लेकिन यह संबंध ब-स्थिति अलीम समष्टि नहीं होता बल्कि ब-स्थिति अलीम अंश होता है। ब-स्थिति अलीम समष्टि वह है जो ईश्वर का अपना विशिष्ट ज्ञान है। अत साबिता के द्वारा ईश्वर ने मनुष्य को नामों का ज्ञान प्रदान किया तो उसे अलीम की निस्बत प्राप्त हो गई। इसी ज्ञान को अदृश्य अस्तित्वग़ैब अक़्वान" कहा जाता है। यह ज्ञान अलीम की निस्बत के अंतर्गत प्राप्त होता है।

क़ानून:
यदि मनुष्य ज़ेह्न को रिक्त करके उस संबंध की ओर उन्मुख हो जाए तो साबिता की सभी तजल्लियात  साक्षात्कार कर सकता है। यह संबंध वास्तव में एक स्मृति है। यदि कोई व्यक्ति मुराकबा के द्वारा उस स्मृति को पढ़ने का प्रयास करे तो वह उसे अनुभूति प्रवेशया साक्षात्कार में पढ़ सकता है। नबी और नबियों के विरासत प्राप्त समूह ने ज्ञान-बोध (तफ़हीम) की विचारधारा पर इस स्मृति तक पहुँच प्राप्त की है।

Topics


लोह़ ओ कलम Loh o Qalam

Qalandar Baba Aulia Rahmatullah Alai