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अना की विश्लेषण "तहलील"

     ख़ाकी (भौतिक) लोक के साथ एक दूसरी दुनिया भी आबाद है। यह दूसरी दुनिया धर्म की भाषा में सीमांत लोक (आराफ़) या बरज़ख़ कहलाती है। इस लोक में जीवन-भर मनुष्य का आना-जाना होता रहता है। इस आने-जाने के बारे में अनेक सच्चाइयाँ मनुष्य की निगाह से छुपी रहती हैं, लेकिन यह आवागमन ग़फ़लत की अवस्था में घटित होता है। जब मनुष्य सो जाता है तो ख़ाकी लोक मलकोती लोक में परिवर्तित हो जाता है। वहाँ वह चलता-फिरता, खाता-पीता और वे सभी कार्य करता है जो जाग्रत अवस्था में कर सकता है। मनुष्यों ने इसका नाम स्वप्न रखा है, लेकिन कभी इस सत्य पर विचार करने का प्रयास नहीं किया कि स्वप्न भी जीवन का एक अंश है।

इस स्थान पर ब्रह्मांड की संरचना का संक्षिप्त उल्लेख कर देना आवश्यक है। सामान्य परिभाषा में जिसे जड़ पदार्थ कहा जाता है, वही जीवन का प्रारम्भिक हैयूला है।

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Loh o Qalam (Hindi)

Qalandar Baba Aulia Rahmatullah Alai